Friday, March 27, 2026
Home Gossip/News अब कलाकारों और मजदूरों की आवाज बनेंगी दो बड़ी यूनियनें

अब कलाकारों और मजदूरों की आवाज बनेंगी दो बड़ी यूनियनें

0
203

मुम्बई। सिने जगत के कलाकारों और मजदूरों के हकों की लड़ाई का जिम्‍मा फिल्‍म जगत की दो बड़ी यूनियनों ने मिलकर उठा लिया है।

हाल ही में फिल्‍म जगत की दो प्रख्‍यात फिल्म यूनियनों ‘फिल्म स्टूडियोज सेटिंग एंड एलाइड मज़दूर यूनियन’ और ‘सिने एंड आर्टिस्ट्स एसोसिएशन’ (सिन्टा) की ओर से फिल्म स्टूडियोज सेटिंग एंड एलाइड मज़दूर यूनियन के ऑफिस, मालाड (ईस्ट), मुम्बई में एक बैठक का आयोजन किया गया।

इस मीटिंग में फिल्म स्टूडियोज सेटिंग एंड एलाइड मज़दूर यूनियन के जनरल सेक्रेटरी गंगेश्वरलाल श्रीवास्तव उर्फ़ संजू और ‘सिने एंड आर्टिस्ट्स एसोसिएशन’ (सिन्टा) के जनरल सेक्रेटरी सुशांत सिंह विशेष रूप से उपस्‍थित थे।

इस मौके पर निर्णय लिया गया कि अब दोनों यूनियन मिलकर फिल्म इंडस्ट्री के कलाकारों और मज़दूरों के हित में काम करेंगी और जल्द ही सभी फिल्म स्टुडियोज, फिल्म निर्माताओं और सरकार को उनकी मांगें पहुंचाई जाएंगी।

इस अवसर पर फिल्म स्टूडियोज सेटिंग एंड एलाइड मज़दूर यूनियन के जनरल सेक्रेटरी गंगेश्वरलाल श्रीवास्तव उर्फ़ संजू ने कहा, “यह फिल्म इडस्ट्री के लिए एक अच्छी और प्रगतिशील कदम है। हम लोग चाहते हैं कि फिल्म इंडस्ट्री के मज़दूरों और कलाकारों को इंसान समझा जाय तथा उनको सेफ्टी, अच्छा खाना, उचित पेमेंट, एक घंटे का ब्रेक इत्यादि मिले। इसके लिए अब सिन्टा के साथ मिलकर हम लोग काम करेंगे। हम लोग किसी के खिलाफ नहीं है। सभी लोग फिल्म इडस्ट्री में एक दूसरे से जुड़े हुए हैं और जिस तरह ट्रेन के डिब्बे होते हैं। ट्रेन कितनी भी अच्छी बना लो लेकिन उसकी पटरी या उसके किसी भी डिब्बे के एक पहिये ख़राब हो तो ट्रेन कभी भी पटरी से उतर सकती है और हादसा हो सकता है। उसी तरह एक अच्छी फिल्म या धारावाहिक बनाने में सभी डिपार्टमेंट का पूरा सहयोग होना जरूरी होता है। उसी तरह हमलोग चाहते हैं कि एक परिवार की तरह रहे लेकिन यदि किसी एक को तकलीफ होगी तो परिवार कैसे चलेगा? फिर तो कुछ ठोस कदम उठाना पड़ेगा ही। हम चाहते है सभी लोग हमे सहयोग दे।’

‘सिने एंड आर्टिस्ट्स एसोसिएशन’ (सिन्टा) के जनरल सेक्रेटरी और अभिनेता सुशांत सिंह ने कहा, ‘आज कुछ ही फिल्म कलाकारों को मेकअप रूम मिलता है और ज्यादातर कलाकारों को कॉमन मेकअप रूम मिलता है। लेकिन कॉमन मेकअप रूम में टॉयलेट, बैठने की व्यवस्था इत्यादि काफी ख़राब होती है। लोगों को एक घंटे का लंच ब्रेक तक नहीं मिलता है। आज लोग केवल 30 मिनट का फुटेज निकालने में लगे हैं, वह चाहे जैसे आये उनको इसकी परवाह नहीं है। फिल्म स्टूडियो में कोई भी एम्बुलेंस, फायर, सेफ्टी का कोई इंतजाम सही ढंग से नहीं होता है। वर्करों और कलाकारों को उचित ढंग का खाना तक नहीं मिलता है। इसी सबको लेकर हम दोनों यूनियन अब काम करेंगे। संजू जी ने सही कदम उठाया है। हमलोग अब फिल्म कलाकारों और मज़दूरों की लड़ाई मिलकर लड़ेंगे।’