पैराडाइज पेपर्स! एक और तोहमत अभिनेता अमिताभ बच्चन के दरवाजे पर

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रविवार की बात है। पर्दे के शहंशाह अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग बच्चन बोल पर अपने पर लगे हुए तमाम आरोपों का बड़ी संजीदगी के साथ जवाब दिया। या तो अमिताभ बच्चन को आने वाली तोहमत का इल्म हो गया था या फिर अमिताभ बच्चन के अचेतन मन ने उनके व्यक्तित्व के इर्दगिर्द घूमने वाली तारंगों को भांप लिया था क्योंकि अमिताभ बच्चन की सफाई उस समय आई, जब उनके दरवाजे पर एक नयी तोहमत दस्तक देने वाली थी।

यह नयी तोहमत सोमवार को द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित हुई सनसनीखेज ख़बर से जन्मीं, जो पैराडाइज पेपर्स के नाम से मशहूर दस्तावेजों की छानबीन के आधार पर लिखी गई। यह दस्तावेज जर्मन के एक समाचार पत्र ने इंटरनेशनल कॉन्सार्शियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट (आईसीआईजे) के साथ साझे किए।

रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि अमिताभ बच्चन अपने आर्थिक तंगी के दौर से निकलने के बाद 19 जून 2002 को बारमूडा की कंपनी जलवा बारमूडा के साथ शेयरधारक के रूप में जुड़े। इस कंपनी में अमेरिका स्थित सिलिकॉन वैली के निवेशक नवीन चड्ढा भी शेयर धारक बने।

रिपोर्ट के मुताबिक चार भारतीय उद्यमियों – उर्शित पारिख, गौतम आनंद, तरुण अरोड़ा और शैलेंद्र जे सिंह ने जनवरी 2000 में कैलिफोर्निया में इस कंपनी की स्थापित की। इसे साल फरवरी में भारत में इसे ‘जलवा मीडिया इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ के नाम से लॉन्च किया गया। भारत के बाद जुलाई 2000 में बरमूडा में भी ‘जलवा-बरमूडा’ नाम से कंपनी शुरू की गई, जिसके शेयर्स अमिताभ बच्चन ने लगभग दो साल बाद खरीदे।

दिलचस्प बात यह है कि जलवा बरमूडा को अमिताभ बच्चन के शेयर धारक बनने के बाद साल 2005 में कर्ज में डूबी हुई कंपनी घोषित कर दिया गया था और कंपनी को बंद करने से पहले तक कंपनी की शुरूआत करने वाले सभी संस्थापक एक एक करके कंपनी को छोड़ कर चले गए थे।

रिपोर्ट के अनुसार अमिताभ बच्चन ने जब विदेशी कंपनी में निवेश किया था तब भारत सरकार के नियमों के मुताबिक देश में रह रहे किसी भी भारतीय के लिए विदेशी निवेश करने से पहले भारतीय रिजर्व बैंक से अनुमति लेना अनिवार्य था। हालांकि, यह साफ नहीं हो पाया है कि क्या तब आरबीआई के पास अमिताभ बच्चन के इस निवेश की जानकारी थी या नहीं।

Twitter Amitabh Bachchan

फिलहाल, पैराडाइज पेपर्स संबंधित मामलों में केंद्र सरकार ने निर्देश दिए हैं कि पुर्नगठित मल्टी एजेंसी ग्रुप के जरिए मामले में जांच की निगरानी की जाएगी। इन्वेस्टिगेटिव ग्रुप की अध्यक्षता सीबीडीटी के चेयरमैन करेंगे। ग्रुप में सीबीडीटी, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट के प्रतिनिधि भी होंगे।

इस मामले की जांच के बाद ही तय हो पाएगा कि अमिताभ बच्चन का विदेशी कंपनी में निवेश गैर कानूनी था या कानूनी। लेकिन, पैराडाइज पेपर्स ने अमिताभ बच्चन को एक बार फिर उसी जगह लाकर खड़ा कर दिया है, जहां से अमिताभ बच्चन मुक्ति चाहते हैं। इस मुक्ति का जिक्र अमिताभ बच्चन ने रविवार को अपने ब्लॉग में किया था।

अंत में अमिताभ बच्चन की रविवारिया ब्लॉग पोस्ट के अंत से कुछ विशेष बातें, जो अमिताभ बच्चन ने इस तोहमत के आने से पहले लिखी थी।

इस उम्र में मुझे शोहरत से मुक्ति और शांति चाहिए। अपने जीवन के आखरी कुछ सालों में मैं अपने साथ अकेला रहना चाहता हूं। मुझे उपाधि नहीं चाहिए। मैं उससे घृणा करता हूं। मैं सुर्खियों की तलाश नहीं करता, मैं उसके लायक नहीं हूं। मैं प्रशंसा नहीं चाहता। मैं उसके योग्य नहीं हूं।

इस ब्लॉग में पनामा पेपर्स, बीएमसी के नोटिस का जिक्र करते हुए अमिताभ बच्चन लिखते हैं कि हमने एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में हमेशा पूरा सहयोग किया और इसके बाद भी यदि और जांच होगी तो हम पूरा सहयोग करेंगे।

– कुलवंत हैप्पी