नंदिता को पसंद नहीं सेंसर बोर्ड की मनमानी

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मुंबई। अभिनेत्री-निर्देशक नंदिता दास को सेंसर बोर्ड की मनमानी प्रक्रिया पसंद नहीं है, उन्होंने फिल्मों के लिए रेटिंग प्रणाली को तरजीह दी है। कशिश फिल्मोत्सव में एक पैनल चर्चा के दौरान नंदिता ने अपने बयान में यह बात कही।

नंदिता ने कहा, “सेंसरशिप काफी खतरनाक चीज है, क्योंकि इसमें 5-6 लोग मिलकर यह फैसला लेते हैं, कि देश की दो अरब जनता क्या देखेगी? ऐसा संभव है कि कोई चीज आपको नापसंद हो, लेकिन मुझे पसंद हो। हो सकता है कि जो मुझे पसंद हो वो किसी और को नापसंद हो। हमें लोगों पर भरोसा करना होगा, ताकि हम सर्वसम्मिति से सही गलत के बारे में फैसला ले सकें।”

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उन्होंने कहा, “आज हर चीज इंटरनेट पर उपलब्ध है। आशा है कि रेटिंग प्रणाली होगी ताकि केवल पांच लोग ही सही गलत का फैसला न ले सकें।”

इससे पहले सुपरस्टार आमिर खान ने भी रेटिंग प्रणाली का समर्थन किया था। इस प्रणाली का कुछ देशों में पालन किया जा रहा है, जहां फिल्म की विषय वस्तु को देखकर प्रमाणपत्र दिया जाता है।

नंदिता की शबाना आजमी के साथ आई फिल्म ‘फायर’ को सेंसर बोर्ड से काफी संघर्ष करना पड़ा था। यह फिल्म ‘समलैंगिक संबंधों’ पर आधारित थी। उनकी 2002 गुजरात दंगों पर आधारित फिल्म ‘फिराक’ को बोर्ड ने रिलीज होने से पहले प्रतिबंधित कर दिया।

उनकी निर्देशक के रूप में अगली फिल्म पाकिस्तान के मशहूर लेखक सादत हसन मंटो पर आधारित है।
-आईएएनएस