..क्यों जरूरी था लियोनार्डे का ऑस्कर जीतना

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नई दिल्ली। ‘लियोनार्डे डिकैप्रियो इस बार ऑस्कर जीत पाएंगे या नहीं।’ इसी जुमले के साथ इस बार भी ऑस्कर सुर्खियों में छाया रहा लेकिन रविवार रात डॉल्बी थिएटर में जो हुआ वह इतिहास बन गया। 22 साल के लंबे इंतजार के बाद लियोनाडरे ऑस्कर जीतने में सफल रहे। अमेरिका के लॉस एंजेलिस में आयोजित 88वें अकादमी अवॉर्ड में हॉलीवुड अभिनेता लियोनार्डे डिकैप्रियो को अपने करियर का पहला ऑस्कर मिला। उन्हें फिल्म ‘द रेवनंट’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के पुरस्कार से नवाजा गया। यह क्षण लियोनार्डे के प्रशंसकों के लिए एक सपने के सच होने जैसा था ।

लियोनार्डे ने ऑस्कर जीतने के बाद अपने भाषण में जलवायु परिवर्तन का उल्लेख किया, जिसकी व्यापक स्तर पर सराहना की जा रही है। वह संयुक्त राष्ट्र के शांतिदूत भी हैं। वह कॉफी के ‘फेयर ट्रेड’ ब्रैंड के साथ भी जुड़े हैं, जिसका मुनाफा पर्यावरण से जुड़े कार्यों में खर्च होता है। वह बाघों को बचाने के लिए भी काफी दान कर चुके हैं।

इस बार ऑस्कर जीतना लियोनार्डे के लिए काफी जरूरी थी क्योंकि पांच बार नामांकित होने के बाद लियोनार्डे पर सोशल मीडिया से लेकर अखबारों तक में तंज कसे जा रहे थे। उनके ऑस्कर नहीं जीत पाने को अपशकुन और विपदा तक से जोड़कर देखा जा रहा था।

लियोनार्डे की खिल्ली उड़ाने से लेकर, भद्दे एवं फूहड़ चुटकुले तक सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके थे और अगर इस बार भी ऑस्कर की ट्रॉफी उनके हाथ नहीं लगती तो ये सिलसिला फूहड़ता के एक नए आयाम तक पहुंच सकता था।

दूसरी तरफ, लियोनार्डे के प्रशंसकों के सब्र का बांध भी टूटता जा रहा था। वह लियोनाडरे के लिए एक अदद ऑस्कर की आस कर रहे थे। स्पेन के मेड्रिड में उनके 85 वर्षीय प्रशंसक ने स्थानीय टीवी चैनल को बताया कि वह अपनी मौत से पहले लियोनाडरे के हाथ में ऑस्कर देखना चाहते थे।

लंबे अर्से से लियोनार्डे के ऑस्कर जीतने की कामना कर रहे उनके प्रशंसकों के लिए वह क्षण काफी सुखद रहा, जब वह जीत के ऐलान के बाद मंच पर ट्रॉफी लेने पहुंचे। ट्विटर से लेकर फेसबुक तक सोशल मीडिया के तमाम माध्यमों के जरिए लियोनार्डे के प्रशंसकों ने अपनी इस खुशी का इजहार किया।

दिल्ली के खालसा कॉलेज की छात्रा खुशी खत्री कहती हैं कि ‘द रेवनंट’ देखने के बाद मुझे विश्वास हो गया था कि इस बार उन्हें जीतने से कोई नहीं रोक सकता।

रोहिणी में रहने वाले आदर्श गुप्ता कहते हैं, ” मैं लियोनाडरे का बहुत बड़ा प्रशंसक हूं। उनकी हर फिल्में 10 बार देखी है और सच कहूं तो मैं बता नहीं सकता कि उनके जीतने पर मुझे कितनी खुशी हुई है।”

देश में नहीं बल्कि दुनियाभर में लियोनार्डे के प्रशंसकों ने उनकी जीत का जश्न मनाया। इटली के रेस्तरां में ‘रेवनंट’ नाम से एक विशेष व्यंजन ग्राहकों को परोसा गया, जिसमें ऑस्कर लिए लियोनार्डे का चेहरा था।

आस्ट्रेलिया और स्पेन के कई शहरों में लियोनार्डे के ऑस्कर जीतने के बाद आतिशबाजी की गई और कई स्टोरों में ग्राहकों को विशेष उपहार दिए गए।

लियोनार्डे का यह पहला ऑस्कर है लेकिन वह पहले भी पांच बार ऑस्कर के लिए नामांकित हो चुके हैं। वह 1993 में पहली बार फिल्म ‘व्हाट्स ईटिंग गिलबर्ट ग्रेप’ के लिए ऑस्कर में नामांकित किया गया था लेकिन यह सहायक अभिनेता की श्रेणी में था।

इसके बाद लियोनार्डे को 2005 में ‘द एविएटर’ के लिए पहली बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए नामांकित किया गया। 2007 में ‘ब्लड डायमंड’, 2014 में ‘द वुल्फ ऑफ वॉलस्ट्रीट’ और 2016 में ‘द रेवनंट’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता की श्रेणी में नामांकित किया गया।

लियोनार्डे ने अपने दो दशक लंबे करियर में कई शानदार फिल्में की है, जो उनके लिए मील का पत्थर साबित हुई हैं। इनमें ‘टाइटेनिक’, ‘कैच मी इफ यू कैन’, ‘द एवएिटर’, ‘द वूल्फ ऑफ वॉल स्ट्रीट’, ‘ब्लड डायमंड’, ‘द ग्रेट गाटस्बी’, ‘द डिपार्टेड’, ‘इंसेप्शन’ और ‘द रेवनंट’ प्रमुख हैं। ‘द रेवनंट’ के लिए लियोनार्डे ने खासी मेहनत की। उन्होंने इस फिल्म के लिए भैंस का कच्चा लीवर तक खाया है, जबकि वह वास्तविक जीवन में शाकाहारी हैं।

लियोनार्डे की इस जीत पर देश-विदेश के उनके प्रशंसकों ने उन्हें बधाई दी। इनमें आम लोगों से लेकर कई गणमान्य लोग शामिल हैं, जिनमें संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून भी हैं।

ऑस्कर समारोह में मौजूद लियोनार्डे की अच्छी दोस्त अभिनेत्री केट विंसलेट, लियोनार्डे के नाम की घोषणा पर बहुत ही खुश और भावुक नजर आई और उन्होंने बाद में लियोनार्डे के इस जीत के सिलसिले को बरकरार रखने की इच्छा भी व्यक्त की। रीतू तोमर (आईएएनएस)