Editorial : करण जौहर को विरासत में सफलता नहीं, केवल जिम्‍मेदारी मिली थी

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सफलता विरासत में नहीं मिलती, हासिल करनी पड़ती है। कुछ हासिल करने के लिए कुछ दांव पर भी लगाना पड़ता है और कुछ दांव पर लगाने के लिए साहस की जरूरत होती है और साहस के लिए जिगर की।

लगता है कि करण जौहर के पिता यश जौहर के पास जिगर था, तभी तो डुप्‍लीकेट की औसत से कम सफलता के बाद भी यश जौहर ने करण जौहर के नए नवेले निर्देशन पर विश्‍वास कर ‘कुछ कुछ होता है’ बनाने की हिम्‍मत जुटाई। शाह रुख खान की डुप्‍लीकेट से पहले अग्निपथ में यश जौहर बॉक्‍स ऑफिस पर असफलता का स्‍वाद चख चुके थे।

जब करण जौहर कुछ कुछ होता है बनाने की सोच रहे थे, तब शाह रुख खान सफलता की पक्‍की गारंटी नहीं था, क्‍योंकि शाह रुख खान की कुछ कुछ होता है से पहले और बाद में लगातार बहुत सी फिल्‍में फ्लॉप हुई थीं। और अभिनेता सफलता की गारंटी होता भी नहीं, यदि ऐसा होता तो दिलवाले और जीरो बॉक्‍स ऑफिस पर औंधे मुंह न गिरी होतीं।

करण जौहर पैराशूट से नहीं उतरा, बल्कि उसने फिल्‍म निर्देशन में कदम रखने से पहले आदित्‍य चोपड़ा की फिल्‍म दिलवाले दुल्‍हनिया ले जाएंगे में बतौर सहायक निर्देशक और कॉस्ट्यूम डिजाइनर का काम किया।

करण जौहर की समझ कहो या किस्‍मत कहो कि उसकी पहली फिल्‍म कुछ कुछ होता है ने बॉक्‍स ऑफिस पर तहलका मचा दिया। करण जौहर की दूसरी फिल्‍म कभी खुशी कभी गम ने उसको भरोसेमंद फिल्‍मकारों की पहली कतार में लाकर खड़ा कर दिया।

यश जौहर जो सालों से करने में असमर्थ रहे, करण जौहर ने कुछ सालों में कर दिखाया। एक के बाद एक सफल देने के बाद भी करण जौहर ने अपने पिता के रहते धर्मा प्रोडक्‍शन्‍स वाली सीट नहीं संभाली। साल 2004 तक पूरी सक्रिय के साथ करण जौहर ने कॉस्ट्यूम डिजाइनर का काम भी देखा।

बतौर फिल्‍म निर्देशक करण जौहर ने कभी खुशी कभी गम, कभी अलविदा न कहना, माय नेम इज खान, स्‍टूडेंट ऑफ द ईयर, ए दिल है मुश्‍किल जैसी फिल्‍में दी हैं। ऐसा नहीं है कि करण जौहर की फिल्‍मों को इसलिए देखा गया कि उनकी फिल्‍मों के सितारे बेहतरीन थे बल्कि इसलिए देखा गया कि फिल्‍में देखने लायक थीं और इन फिल्‍मों की बदौलत करण जौहर एक सफल फिल्‍म निर्माता बने।

जिस अग्निपथ को यश जौहर के समय सिनेमा प्रेमियों ने बॉक्‍स ऑफिस पर नकार दिया था, उसी अग्निपथ के रीमेक से करण जौहर ने बॉक्‍स ऑफिस पर करोड़ों कमाए, जो साबित करता है कि करण जौहर वक्‍त की नब्‍ज समझते और कारोबार करने की अनूठी समझ रखते हैं।

ट्विंकल खन्‍ना के करीबी दोस्‍त करण जौहर ने अक्षय कुमार के साथ लंबे समय तक फिल्‍में नहीं बनाई, जब अक्षय कुमार ने बॉक्‍स ऑफिस पर धूम मचाना शुरू किया, तो करण जौहर ने अक्षय कुमार पर दांव लगाना शुरू किया, जो एक कारोबारी की निशानी है, और ऐसी समझ होनी भी चाहिए।

ऐसा नहीं कि धर्मा प्रोडक्‍शन्‍स ने करण जौहर की अगुवाई में फ्लॉप फिल्‍में नहीं दी, लेकिन, नुकसान की भरपाई करना करण जौहर को आता है, तभी तो बड़ी बड़ी फ्लॉप देने के बाद भी करण जौहर बाजार में टिके हुए हैं।

करण जौहर पर आरोप लगता है कि करण जौहर फिल्‍मी सितारों के बच्‍चों को ही अपने बैनर तले लॉन्‍च करते हैं, तो यह गलत बात है। सिद्धार्थ मल्‍होत्रा कौन है? करण जौहर ने वरुण धवन और आलिया भट्ट के साथ स्‍टूडेंट ऑफ द ईयर से उतारा था और उसके बाद सिद्धार्थ मल्‍होत्रा के साथ और कई फिल्‍में की, जिसमें से कुछ चली और कुछ फ्लॉप हुईं। गिप्‍पी नामक फिल्‍म से रिया विज को उतारा था। उंगली में रणदीप हुड्डा, कंगना रनौट थीं। इरफान खान और नवाजुद्दीन सिद्द‍िकी की द लॉन्‍चबॉक्‍स के निर्माता बने।

और दूसरी बात, करण जौहर ने दौलत शोहरत अपने काम से कमाई है। उसको किसी सरकारी खजाने से हिस्‍सेदारी नहीं मिली, जो हर किसी पर लुटाता चले और यहां हर कोई सफल होने के लिए मेहनत करता है। यदि करण जौहर की फिल्‍में फ्लॉप हो जाती और अन्‍य निर्माताओं की तरह कंगाली की दलदल में फंस जाता तो करण जौहर की मदद करने के लिए कौन आगे आता?
करण जौहर की शोहरत करण जौहर की है, वो फिल्‍मी सितारों के प्रतिभाहीन बच्‍चों पर लुटाएं या प्रतिभाशाली बच्‍चों पर लगाकर मुनाफा कमाएं, वो करण जौहर का फैसला है।

पर, एक बात याद रखिए, करण जौहर के कंधों पर पिता के कारोबार को संभालने की जिम्‍मेदारी आई थी, सफलता और पहचान तो करण जौहर ने खुद अर्जित है। करण जौहर ने बेहतरीन फिल्‍मकार के रूप में ही नहीं, बल्कि एक बेहतरीन वारिस के रूप में भी पहचान स्‍थापित की है।