Movie Review! फिल्‍म रईस: 80, 90 का शुद्ध बॉलीवुड जायका

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फिल्‍मकार राहुल ढोलकिया, जो फिल्‍म परजानिया के लिए जाने जाते हैं, ने फिल्‍म रईस से अभिनेता शाह रुख खान को नयी स्‍टाइलिश और हाई फाई पर्दे की दुनिया से निकालकर 80 और 90 के दशक में फेंक दिया। जहां अभिनेता के पास अभिनय क्षमता साबित करने के लिए विशाल स्‍लॉट होता था।

फिल्‍म रईस गरीब बच्‍चे के रईस अपराधी बनने की गाथा है, जो गुजरात के एक शराब माफिया लतीफ से प्रेरित है। रईस की मां घर खर्च के लिए कबाड़ का काम करती हैं। गरीबी में जन्‍मा रईस अपनी अम्‍मी जान की हर अच्‍छी बात को अपने अर्थों का लिबास पहनाता है। शराबबंदी के दौर में रईस बचपन से भी शराब तस्‍करी के धंधे से जुड़ा है। लेकिन, रईस अपना धंधा शुरू करना चाहता है। रईस भी अपने मंसूबों में कामयाब होता है, जैसे फिल्‍म गुरू में गुरू भाई।

अभिनेता शाह रुख खान ने फिल्‍म रईस में जबरदस्‍त अभिनय किया है। नवाजुद्दीन सिद्दिकी की अदाकारी तो सोने पे सुहागे का काम करती है। फिल्‍म के संवाद भी दमदार लिखे गए हैं। फिल्‍म में ऐसे कई मौके आएंगे, जब आपको सिनेमा हॉल में सीटियों और तालियों की आवाजें सुनाई देंगी। फिल्‍म का फिल्‍मांकन बेहद उम्‍दा है। फिल्‍म को 80, 90 के दशक के ढर्रे पर ही बनाया गया है।

फिल्‍म में कहीं कहीं माहिरा खान शाह रुख खान के साथ रोमांस करती अच्‍छी लगती हैं। उड़ी उड़ी और ओ जालिमा में जोड़ी असर छोड़ती है। यदि इस पक्ष को फिल्‍म से हटा भी दिया जाता तो फिल्‍म पर इसका अधिक फर्क नहीं पड़ने वाला था। फिल्‍म रईस सिंगल स्‍क्रीन और मल्‍टीस्‍क्रीन सिनेमा घरों में चलने लायक है।

फिल्‍म रईस को लाजवाब प्रस्‍तुतिकरण, शाह रुख खान के शानदार अभिनय (जिसको लंबे समय से मिस किया जा रहा था), बेहतरीन संवादों, उम्‍दा निर्देशन, एक्‍शन सीनों और नवाजुद्दीन की अदाकारी के लिए देखा जा सकता है।

हालांकि, फिल्‍म इंटरमेशन तक तेज गति से पूरी पकड़ के साथ दौड़ती है। लेकिन, इंटरवल के बाद रईस की गति थोड़ी सी धीमी होने लगती है। फिल्‍म में पुलिस और रईस टॉम एंड जैरी की भूमिका में हैं। फिल्‍म रईस 80, 90 के दशक का शुद्ध बॉलीवुड जायका है।

यदि रेटिंग की बात करें तो फिल्‍म रईस को 5 में से 3 स्‍टार रेटिंग आराम से दी जा सकती है।