Sunday, August 1, 2021
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नंदिता दास की मंटो : त्रासदियों से भरा चलचित्र

सआदत हसन मंटो संबंधित फिल्म मंटो त्रासदियों से भरी हुई है। अशोक कुमार और श्याम चढ्डा जैसे सितारों के साथ करीबियां होने के बावजूद भी दयनीय जीवन बसर किया, क्योंकि अपनी शर्तों पर टिके रहने की जिद्द बड़े बड़े फनकारों को खत्म कर देती है, पहले सुपर स्टार राजेश खन्ना की तरह।

शबाब की दर्दनीय कहानियों को शब्दफलक पर उतारने वाले अफसानानिगार को शराब और सनक ने खत्म कर दिया। काम सनक बन गया, और सनक की गोद से जन्में अड़ियल रवैये ने धीरे धीरे मंटो को अकेला कर दिया। कुछ ऐसा ही कहती है नंदिता दास की मंटो।

इसमें कोई दो राय नहीं कि नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने अपनी उम्दा अदाकारी से मंटो का किरदार बड़े पर्दे पर जीवंत कर दिया है। रसिका दुग्गल ने मशहूर ​अफसाना निगार की चिंतित और शांत
बीवी  का किरदार बहुत उम्दा तरीके से अदा किया। नवाजुद्दीन सिद्दीकी,  रसिका दुग्गल  के अलावा अन्य कलाकारों ने भी अपने किरदारों को बड़ी खूबसूरती के साथ निभाया।

नंदिता दास ने कलाकारों का चयन बड़ी संजीदगी और समझदारी के साथ किया। ऋषि कपूर, परेश रावल, गुरदास मान, दिव्या दत्ता, रणवीर सौरी, रसिका दुग्गल समेत अन्य कलाकारों की छोटी सी हाजिरी भी प्रभावित करती है।

फिल्म के मूड के हिसाब से बैकग्राउंड म्यूजिक और सिनेमेटोग्राफी दोनों ही उम्दा हैं। हालांकि, उन दर्शकों को फिल्म निराश कर सकती है, जो मंटो के बारे में काफी कुछ जानते हैं और मंटो के जीवन और अफसानों पर आधारित नाटकों का मंचन देख चुके हैं।

कुल मिलाकर कहें तो नंदिता दास निर्देशित फिल्म मंटो मायानगरी में बनने वाली ज्यादातर फिल्मों से हटकर है। नंदिता दास ने मंटो को मसाला फिल्म बनाने की कोशिश नहीं की। फिल्म मंटो को आगे बढ़ाने के लिए मंटो के जीवन और उनके लिखे अफसानों का मिलान भी बड़ी खूबसूरती से किया गया। नंदिता दास ने मंटो की उनकी कहानियों के अंशों का चयन किया, जो समाज को नयी दिशा दे सकते हैं। अदालत में जज के सामने मंटो बने नवाजुद्दीन सिद्दीकी द्वारा अपना पक्ष रखना और पार्क में बीवी के साथ बैठकर अफसाने गढ़ना, एक चाय की दुकान के पास बैठे व्यक्ति द्वारा अख़बार पढ़ना, दिव्या दत्ता और रणवीर शौरी का रोमांस जैसे सीन लाजवाब हैं।

चलते चलते इतना ही कहेंगे कि यदि आप बॉलीवुड की मसाला फिल्मों के आशिक हैं, तो अफसाना निगार सआदत हसन मंटो के जीवन पर आधारित फिल्म मंटो आपके लिए कतई बेहतरीन फिल्म नहीं होगी। यदि कुछ हटकर देखना पसंद करते हैं, तो यह फिल्म आपको पसंद आ सकती है।

-कुलवंत हैप्पी

Kulwant Happyhttps://www.filmikafe.com
कुलवंत हैप्‍पी, संपादक और संस्‍थापक फिल्‍मी कैफे | 14 साल से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं। साल 2004 में दैनिक जागरण से बतौर पत्रकार कैरियर की शुरूआत करने के बाद याहू के पंजाबी समाचार पोर्टल और कई समाचार पत्रों में बतौर उप संपादक, कॉपी संपादक और कंटेंट राइटर के रूप में कार्य किया। अंत 29.01.2016 को मनोरंजक जगत संबंधित ख़बरों को प्रसारित करने के लिए फिल्‍मी कैफे की स्‍थापना की।
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