मशहूर शायर निदा फाजली का देहांत

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हिन्‍दी एवं उर्दू के मशहूर शायर निदा फाजली का देहांत हो गया। 78 वर्षीय शायर लंबे समय से बीमार चल रहे थे। आज सुबह दिल का दौरा पड़ने से मुंबई में निधन हो गया है। पद्मश्री और साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्‍मानित निदा फ़ाज़ली का असली नाम मुक़्तदा हसन था। जानकार बताते हैं कि निदा का मतलब है स्वर एवं फ़ाज़िला कश्मीर का एक इलाका है। इस इलाके से निदा फाजली का काफी गहरा रिश्‍ता है, क्‍योंकि यहां उनके पुरखे रहते थे।

निदा फ़ाज़ली का जन्म 1938 में दिल्ली में हुआ था। लेकिन, उनका लालन पालन ग्वालियर में हुआ। सांप्रदायिक दंगों से तंग आकर उनके माता-पिता पाकिस्तान चले गए। मगर, निदा ने भारत में रहना पसंद किया। नौकरी की तलाश में मुम्‍बई गए। यहां पर उन्होंने कुछ पत्रिकाओं के लिए कार्य किया।

शायर-ओ-शायरी के अलावा निदा फाजली ने हिन्‍दी फिल्‍मों के लिए गीत भी लिखे। गीतकारी के क्षेत्र में आने का किस्‍सा भी बड़ा अजब है। जानकार बताते हैं कि उन दिनों फ़िल्म निर्माता-निर्देशक-लेखक कमाल अमरोही फ़िल्म रज़िया सुल्ताना बना रहे थे। इस फिल्‍म के गीत जावेद अख्‍़तर के पिता जाँनिसार अख़्तर लिख रहे थे, जिनका अचानक देहांत हो गया।

जाँनिसार अख़्तर ग्वालियर से तालुक रखते थे और उनको निदा के लेखन के संबंध में जानकारी थी। इस बारे में उन्होंने कमाल अमरोही से जिक्र भी किया हुआ था। कमाल अमरोही ने निदा फाजली से संपर्क किया और उन्हें फ़िल्म के वो शेष रहे दो गाने लिखने को कहा, जो कि उन्होंने लिखे। इस प्रकार उन्होंने फ़िल्मी गीत लेखन प्रारम्भ किया और उसके बाद इन्होंने कई हिन्दी फिल्मों के लिये गाने लिखे। उनकी कलम से ‘कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता’, ‘आ भी जा, आ भी जा’, ‘तू इस तरह से मेरी जिंदगी में शामिल है’ और ‘होश वालों को खबर क्या’ जैसे गीत निकले, जो बेहद मकबूल हुए।